कुल बजट और कैपिटल खर्च
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस बार रक्षा मंत्रालय का कुल बजट 7 लाख करोड़ रुपये से ऊपर जाने की संभावना है। खासतौर पर हथियारों की खरीद के लिए कैपिटल बजट 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा रखा जा सकता है। इससे तीनों सेनाओं थल सेना, नौसेना और वायु सेना को सीधा लाभ मिलेगा।
वायु सेना को सबसे अधिक फायदा
विशेषज्ञों का अनुमान है कि वायु सेना को सबसे ज्यादा फायदा होगा। आने वाले वित्तीय वर्ष में एयर-टू-एयर रिफ्यूलर विमान और एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (AWACS) जैसी अत्याधुनिक प्रणालियों की खरीद हो सकती है। रिफ्यूलर विमानों के लिए अमेरिका और इजराइल के साथ बातचीत जारी है, जबकि AWACS सिस्टम के लिए ब्राजील से समझौते की संभावना है।
बड़ी डील्स की तैयारी
सुरक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि 114 राफेल लड़ाकू विमानों के लिए लगभग 30 अरब यूरो का सौदा मार्च 2027 तक पूरा हो सकता है। इसके लिए रक्षा अधिग्रहण परिषद की मंजूरी आवश्यक होगी। इसके अलावा, फ्रांसीसी कंपनी सफ्रान (Safran) और DRDO के बीच विमानों के इंजन निर्माण पर भी सहयोग का प्रस्ताव है, जिसकी लागत लगभग 3 अरब यूरो होगी।
पिछली तुलना
पिछले साल रक्षा बजट 6,81,210 करोड़ रुपये था, जिसमें कैपिटल बजट 1,80,000 करोड़ रुपये था। इस बार बजट में डबल-डिजिट वृद्धि की संभावना है, जिससे सेना को आधुनिक और आवश्यक हथियारों के लिए पर्याप्त फंड मिलेगा। इस बढ़ोतरी से न केवल सेना की क्षमता में वृद्धि होगी, बल्कि देश की सुरक्षा ढांचा भी मजबूत होगा। साथ ही, नए उपकरण और विमानों की खरीद से भारतीय सैन्य उद्योग और रक्षा अनुसंधान में भी प्रगति देखने को मिलेगी।
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