ट्रंप को झटका! भारत जारी रख सकता है रूसी तेल की खरीद

नई दिल्ली। अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले ने वैश्विक ऊर्जा बाजार और कूटनीति में नई बहस छेड़ दी है। अदालत ने IEEPA के तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापक टैरिफ को निरस्त कर दिया, जिससे राष्ट्रपति की आपात आर्थिक शक्तियों के इस्तेमाल पर सीमाएं तय हो गईं। विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले से भारत पर रूसी तेल की खरीद कम करने का अमेरिकी दबाव कुछ हद तक कमजोर पड़ सकता है।

क्या था मामला?

ट्रंप प्रशासन ने पहले भारतीय वस्तुओं पर अतिरिक्त टैरिफ लगाया था और रूस से तेल खरीद को लेकर कड़ा रुख अपनाया था। वॉशिंगटन का तर्क था कि रूस से ऊर्जा खरीद मॉस्को की युद्ध क्षमता को अप्रत्यक्ष समर्थन देती है। हालांकि बाद में एक कार्यकारी आदेश के जरिए शुल्क में आंशिक कमी की गई थी।

अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह संकेत गया है कि व्यापारिक टैरिफ को गैर-व्यापारिक या रणनीतिक दबाव के औजार के रूप में इस्तेमाल करना आसान नहीं होगा। इससे भारत जैसे देशों को अपनी ऊर्जा नीति तय करने में अधिक लचीलापन मिल सकता है।

भारत की ऊर्जा रणनीति?

भारत की ऊर्जा नीति मुख्यतः तीन स्तंभों पर आधारित मानी जाती है कीमत, आपूर्ति की स्थिरता और स्रोतों का विविधीकरण। रूस फिलहाल भारत के लिए रियायती दरों पर कच्चा तेल उपलब्ध करा रहा है, जिससे आयात बिल नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।

डेटा एजेंसियों के अनुसार हाल के महीनों में रूस से आयात में उतार-चढ़ाव जरूर आया है, लेकिन विशेषज्ञों का आकलन है कि भारत प्रतिदिन 8 से 10 लाख बैरल तक रूसी तेल की खरीद जारी रख सकता है, यदि कीमतें अनुकूल रहीं।

क्या अमेरिकी तेल विकल्प बन सकता है?

ऊर्जा विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी कच्चा तेल पूरी तरह रूसी आपूर्ति की जगह नहीं ले सकता। भौगोलिक दूरी, परिवहन लागत और रिफाइनरियों की तकनीकी जरूरतें भी अहम भूमिका निभाती हैं। भारत के रिफाइनर रूसी ग्रेड के तेल को प्रोसेस करने के लिए पहले ही अनुकूलन कर चुके हैं, जिससे लागत लाभ और बढ़ जाता है।

तेल खरीद को लेकर भारत का आगे क्या?

अमेरिकी न्यायिक फैसले के बाद वैश्विक व्यापार और ऊर्जा संबंधों में नई संतुलन रेखाएं खिंच सकती हैं। हालांकि अंतिम प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि भविष्य में अमेरिकी प्रशासन किस तरह की नीतियां अपनाता है।फिलहाल संकेत यही हैं कि भारत अपनी ऊर्जा रणनीति में लचीलापन बनाए रखते हुए रूस से रियायती तेल खरीद जारी रख सकता है।

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