HappyNews@ Media Team

This channel publishes all kinds of news related to the world.you will always be grateful if you always keep such a relationship with me.

HappyNews @ Science and Technology

Click here for every news from science and stay with HappyNews.

Happy News @ प्रेरक विचार

Click here for a relayed news with a motivational idea and stay with HappyNews.

HappyNews @ Politics

Click here for news related to politics and stay with HappyNews.

HappyNews @ Lifestyle and Relationship

Click here for the motive thought with image and stay with HappyNews.

बिहार में मतदाता सूची में नाम जोड़ने का अंतिम मौका

पटना। बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान अंतिम चरण में है। लोकतंत्र के इस महापर्व में हर योग्य नागरिक की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए राज्य निर्वाचन विभाग ने विशेष व्यवस्था की है। यदि आपने अब तक वोटर लिस्ट में नाम नहीं जुड़वाया है या उसमें कोई त्रुटि है, तो आपके पास 1 सितंबर शाम 4 बजे तक का समय है।

क्यों ज़रूरी है वोटर लिस्ट में नाम होना?

वोट डालना केवल एक अधिकार नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी का प्रतीक है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि हर योग्य नागरिक अपना मताधिकार प्रयोग कर सके, निर्वाचन आयोग ने 1 अगस्त को प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित की थी। इसके बाद से दावा-आपत्ति की प्रक्रिया चालू है।

कौन कर सकता है आवेदन?

वह नागरिक जो 1 जुलाई 2025 तक 18 वर्ष के हो चुके हैं या 1 अक्टूबर 2025 तक हो जाएंगे। जिनका नाम प्रारूप मतदाता सूची में नहीं है। जिनके नाम में त्रुटि है, या पता बदलवाना है। जो दिव्यांग श्रेणी में चिह्नित होना चाहते हैं। जिनका नाम गलत तरीके से सूची में दर्ज हो गया है (जैसे मृत्यु हो चुकी हो या स्थानांतरण हो गया हो)।

कौन-से फॉर्म भरें?

नया नाम जुड़वाना: फॉर्म 6

नाम, पता या अन्य विवरण में संशोधन: फॉर्म 8

किसी मृत/अपात्र व्यक्ति का नाम हटवाना: फॉर्म 7

आवेदन कहां करें?

ऑनलाइन के लिए वेबसाइट https://voters.eci.gov.in पर जा कर, यहां से फॉर्म भरकर दस्तावेज़ अपलोड करें और सबमिट करें। ऑफलाइन माध्यम के लिए अपने नजदीकी बीएलओ (Booth Level Officer) से संपर्क करें। प्रखंड सह अंचल कार्यालय या नगर निकाय कार्यालय में विशेष कैंप लगाए गए हैं।

अंतिम अपील

अगर आप चाहते हैं कि आपकी आवाज़ लोकतंत्र में सुनी जाए, तो समय रहते वोटर लिस्ट में नाम दर्ज कराना जरूरी है। यह न केवल आपका अधिकार है, बल्कि लोकतंत्र की मज़बूती के लिए आपकी जिम्मेदारी भी है।

रोज़ाना सूखा नारियल खाने से मिलेंगे ये 6 चौंकाने वाले फायदे!

हेल्थ डेस्क। सूखा नारियल, भारतीय रसोई में केवल स्वाद बढ़ाने तक सीमित नहीं है। इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व शरीर को कई तरह से फायदा पहुंचाते हैं। अगर आप रोज़ाना एक छोटी मात्रा में सूखा नारियल अपनी डाइट में शामिल करते हैं, तो यह आपकी सेहत के लिए एक चमत्कारी आदत बन सकती है।

जानिए सूखा नारियल खाने के 6 जबरदस्त फायदे:

1. दिमागी ताकत बढ़ाए

सूखे नारियल में मौजूद हेल्दी फैट्स, खासकर मीडियम चेन ट्राइग्लिसराइड्स (MCTs), मस्तिष्क की कार्यक्षमता को बेहतर बनाते हैं। यह याददाश्त, एकाग्रता और मानसिक स्पष्टता को बढ़ावा देने में मदद करता है।

2. पाचन तंत्र को बनाए मज़बूत

सूखा नारियल फाइबर से भरपूर होता है, जो पाचन क्रिया को दुरुस्त रखता है। यह कब्ज से राहत दिलाने और पेट साफ रखने में सहायक है। साथ ही आंतों की सेहत को बेहतर बनाता है।

3. इम्यून सिस्टम को दे मजबूती

इसमें पाए जाने वाले लॉरिक एसिड में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-वायरल गुण होते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं और सामान्य संक्रमणों से रक्षा करते हैं।

4. ऊर्जा का पावरहाउस

अगर आप थकान महसूस करते हैं, तो सूखा नारियल एक नैचुरल एनर्जी बूस्टर की तरह काम करता है। इसमें मौजूद हेल्दी फैट्स शरीर को तुरंत ऊर्जा प्रदान करते हैं।

5. त्वचा को बनाए चमकदार

सूखा नारियल खाने से त्वचा में नमी बनी रहती है और यह अंदर से पोषण प्रदान करता है। इसके एंटीऑक्सीडेंट्स झुर्रियों को कम करने और त्वचा को जवान बनाए रखने में मदद करते हैं।

6. हड्डियों को बनाए मज़बूत

इसमें कैल्शियम, फॉस्फोरस और मैग्नीशियम जैसे खनिज तत्व होते हैं, जो हड्डियों और दांतों को मज़बूती प्रदान करते हैं।

पासपोर्ट पावर 2025: वैश्विक मंच पर भारत की बड़ी छलांग

नई दिल्ली। दुनियाभर के नागरिकों की अंतरराष्ट्रीय यात्रा की स्वतंत्रता को आंकने वाले हेनले पासपोर्ट इंडेक्स 2025 की नई रैंकिंग सामने आ चुकी है, और इस बार भारत के लिए यह ख़बर गर्व से भरी है। भारत ने पासपोर्ट ताकत की इस रैंकिंग में चार स्थान की छलांग लगाते हुए 76वें स्थान पर जगह बना ली है। यह उछाल न केवल संख्यात्मक है, बल्कि भारत की वैश्विक छवि और रणनीतिक कूटनीति की भी झलक देता है।

58 देशों में वीजा-फ्री एंट्री

अब भारतीय पासपोर्टधारक 58 देशों में बिना वीज़ा के प्रवेश कर सकते हैं। बीते वर्षों की तुलना में यह संख्या और रैंक दोनों में सुधार का संकेत है। साल 2024 में भारत 80वें स्थान पर था, और उस समय वीजा फ्री या वीजा ऑन अराइवल की सुविधा कुछ कम गंतव्यों तक सीमित थी। यह बदलाव भारत की विदेश नीति, अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों और वैश्विक मंचों पर बढ़ती सक्रियता की सफलता का परिणाम है।

अमेरिका की गिरावट, सिंगापुर का दबदबा

जहां एक ओर भारत ऊपर की ओर बढ़ा है, वहीं दुनिया के सबसे ताकतवर देशों में से एक, अमेरिका, इस साल की रैंकिंग में गिरावट का सामना कर रहा है। अमेरिका अब आइसलैंड और लिथुआनिया के साथ संयुक्त रूप से 10वें स्थान पर आ गया है। यह बीते दो दशकों में अमेरिका की सबसे कम रैंकिंग मानी जा रही है।

दूसरी ओर, सिंगापुर ने एक बार फिर अपनी स्थिति मजबूत करते हुए विश्व का सबसे शक्तिशाली पासपोर्ट बनने का गौरव हासिल किया है। सिंगापुर के नागरिक अब 193 देशों में वीजा-मुक्त यात्रा कर सकते हैं, जो अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी का उच्चतम स्तर है।

शीर्ष देशों की स्थिति एक नज़र में:

सिंगापुर: 193 गंतव्य (1वां स्थान)

जापान, दक्षिण कोरिया: 190 गंतव्य (2 स्थान)

जर्मनी, फ्रांस, इटली आदि: 189 गंतव्य (3 स्थान)

स्वीडन, ऑस्ट्रिया आदि: 188 गंतव्य (4था स्थान)

स्विट्ज़रलैंड, ग्रीस, न्यूजीलैंड: 187 गंतव्य (5वां स्थान)

Pinaka Mk-IV: भारत का नया 300 किमी रेंज वाला रॉकेट लॉन्चर

नई दिल्ली। हिंद महासागर में बढ़ते तनाव और सुरक्षा खतरों को देखते हुए भारत अपनी समुद्री सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए लगातार नए हथियार विकसित कर रहा है। इसी कड़ी में, भारत का स्वदेशी रॉकेट सिस्टम Pinaka Mk-IV अब नौसेना के लिए एक विशेष संस्करण के रूप में तैयार हो रहा है, जो दुश्मन के जहाजों को सैकड़ों किलोमीटर दूर से निशाना बनाने में सक्षम होगा।

नौसेना के लिए खास डिजाइन

इस नए संस्करण को रक्षा अनुसंधान संगठन DRDO की विभिन्न शाखाओं जैसे ARDE, RCI, और DRDL ने मिलकर विकसित किया है। इसका मकसद भारतीय नौसेना को तटीय रक्षा के लिए एक किफायती और प्रभावी हथियार प्रदान करना है, जो जमीन-आधारित बैटरियों से तैनात किया जा सके। यह सिस्टम विशेष रूप से छोटे और मध्यम आकार के दुश्मन के जहाजों जैसे कि पाकिस्तान के अजमत-श्रेणी और MRTP-33 को रोकने के लिए तैयार किया जा रहा है।

Pinaka Mk-IV की तकनीकी खूबियां

Pinaka Mk-IV अपने पूर्ववर्ती मॉडलों से कई मायनों में बेहतर है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी लंबी मारक क्षमता है, जो 300 किलोमीटर तक है। यह एक गाइडेड रॉकेट है, जो उच्च सटीकता के साथ अपने लक्ष्य पर हमला कर सकता है, जिससे मिसाइल का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित होता है।

रॉकेट का कैलिबर 300mm है, जो पिछले 214mm मॉडल से अधिक है, और यह 250 किलोग्राम तक का वारहेड ले जाने में सक्षम है। इससे इसका विनाशक शक्ति काफी बढ़ जाती है। इसके अलावा, इस रॉकेट में DRDO की 'प्रलय' मिसाइल से प्रेरित अत्याधुनिक तकनीकें शामिल हैं, जिसमें अर्ध-बैलिस्टिक मार्गदर्शन और मार्ग बदलने की क्षमता भी शामिल है।

आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक युद्ध तकनीकें

Pinaka Mk-IV में इलेक्ट्रॉनिक काउंटरमेजर (ECM) सिस्टम भी है, जो दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देने में मदद करता है। यह तकनीक रॉकेट को अधिक प्रभावी और सुरक्षित बनाती है, जिससे इसे टारगेट तक पहुंचने से रोकना मुश्किल हो जाता है।

भविष्य की समुद्री सुरक्षा के लिए भारत का नया कदम

Pinaka Mk-IV नौसेना संस्करण भारतीय रक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। इससे न केवल भारत की तटीय सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि यह एक सस्ता और भरोसेमंद विकल्प भी पेश करेगा, जो महंगी मिसाइल प्रणालियों की जगह ले सकेगा। जैसे-जैसे हिंद महासागर में सुरक्षा चुनौतियां बढ़ रही हैं, इस तरह की स्वदेशी तकनीक भारत को मजबूती प्रदान करेगी।

बिहार में लोगों को बड़ी खुशखबरी, मछली पालन पर अब 80% सब्सिडी!

पटना। बिहार सरकार मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण योजना चला रही है, जिसमें मछली पालकों को आर्थिक सहायता के रूप में 60% से लेकर 80% तक की सब्सिडी दी जा रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य के जलाशयों में मत्स्य पालन की उत्पादकता बढ़ाना और मछली पालन को व्यवसाय के रूप में प्रोत्साहित करना है।

जलाशय मात्स्यिकी विकास योजना

इस योजना का नाम है ‘मुख्यमंत्री जलाशय मात्स्यिकी विकास योजना 2025-26’, जिसे बिहार सरकार के पशुपालन एवं मत्स्य संसाधन विभाग के मत्स्य निदेशालय द्वारा संचालित किया जा रहा है। इसके तहत जलाशयों में संचयन आधारित मत्स्य पालन तथा केज (पिंजरा) आधारित मछली पालन तकनीक को बढ़ावा दिया जाएगा। यह योजना विशेष रूप से दक्षिण बिहार के उन जिलों में लागू होगी जहां जलाशय व्यवस्थित नहीं हैं और मत्स्य पालन की संभावनाएं बहुत अधिक हैं।

किन जिलों में लागू होगी योजना?

यह योजना खासकर बांका, नवादा, जमुई, सासाराम, कैमूर, मुंगेर और लखीसराय जिलों में लागू की जा रही है। इन जिलों में मछली पालन को व्यवस्थित कर ग्रामीण विकास में मदद करने के लिए सरकार ने यह आर्थिक सहायता योजना शुरू की है।

आवेदन की अंतिम तिथि और पात्रता

मछली पालन में रुचि रखने वाले इच्छुक किसान और मछली पालक 31 दिसंबर 2025 तक इस योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं। इस तारीख के बाद आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। योजना के तहत सभी वर्गों के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध है, लेकिन अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए यह सब्सिडी 80% तक है, जबकि अन्य वर्गों के लिए 60% की सब्सिडी दी जाएगी।

सब्सिडी के अलावा क्या करना होगा?

सब्सिडी के अतिरिक्त शेष राशि मछली पालक को स्वयं या बैंक लोन के माध्यम से वहन करनी होगी। इसका मतलब है कि योजना के तहत आपको कुल लागत का एक हिस्सा ही भरना होगा, जिससे मछली पालन व्यवसाय शुरू करना आसान और सस्ता हो जाता है।

मछली पालन को बढ़ावा देने की जरूरत क्यों?

बिहार में जलाशयों की संख्या अच्छी खासी है, लेकिन उनका सही उपयोग नहीं हो पा रहा है। मछली पालन न केवल ग्रामीण लोगों को रोजगार देता है बल्कि पोषण सुरक्षा भी सुनिश्चित करता है। यह योजना ग्रामीण विकास और आर्थिक सशक्तिकरण का एक अहम कदम है।

IBPS भर्ती 2025: 13000+ पदों के लिए आवेदन

नई दिल्ली: देश की प्रमुख बैंकिंग भर्ती संस्था Institute of Banking Personnel Selection (IBPS) ने RRB XIV (14वीं) स्केल-I, II, III और ऑफिस असिस्टेंट (OA) पदों के लिए भर्ती अधिसूचना जारी कर दी है। इस भर्ती के तहत कुल 13,217 से अधिक पद भरे जाएंगे। इच्छुक उम्मीदवार 1 सितंबर 2025 से ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं, जो 21 सितंबर 2025 तक चलेगी।

महत्वपूर्ण तिथियाँ:

आवेदन प्रारंभ: 1 सितंबर 2025

आवेदन समाप्ति: 21 सितंबर 2025

परीक्षा शुल्क भुगतान की अंतिम तिथि: 21 सितंबर 2025

आवेदन के लिए उम्मीदवारों की योग्यता: स्नातक पास। 

आयु सीमा और योग्यता:

आवेदकों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 28 से 40 वर्ष तक पदों के अनुसार निर्धारित है, जो 1 सितंबर 2025 को लागू होगी। सभी उम्मीदवारों से निवेदन है कि वे आवेदन करने से पहले आधिकारिक नोटिफिकेशन में दी गई योग्यता और आयु सीमा जरूर जांच लें।

आवेदन शुल्क:

सामान्य, ओबीसी एवं ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए आवेदन शुल्क ₹850 है, जबकि एससी, एसटी और पीएच वर्ग के लिए यह ₹175 निर्धारित किया गया है। भुगतान ऑनलाइन माध्यमों से किया जा सकता है जिसमें डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग, IMPS, कैश कार्ड और मोबाइल वॉलेट शामिल हैं।

कैसे करें आवेदन?

इच्छुक उम्मीदवार IBPS की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भर सकते हैं। आवेदन फॉर्म भरते समय सभी विवरण सही-सही भरना अत्यंत आवश्यक है। अधूरी या गलत जानकारी पर आवेदन निरस्त किया जा सकता है।

यूपी समेत देशभर के 'ग्रामीण बैंकों' में बंपर भर्ती

लखनऊ। यूपी समेत देशभर के ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेक्टर में करियर बनाना चाहने वाले युवाओं के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सिलेक्शन (IBPS) ने 2025 के लिए रीजनल रूरल बैंक (RRB) भर्ती परीक्षा की ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस भर्ती प्रक्रिया के तहत ग्रुप ए ऑफिसर स्केल और ग्रुप बी ऑफिस असिस्टेंट (मल्टीपर्पज) के पदों पर भर्ती की जाएगी।

IBPS CRP RRB XIV भर्ती के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी

इस बार की भर्ती के लिए आवेदन IBPS की आधिकारिक वेबसाइट ibps.in पर किए जा सकते हैं। आवेदन करने की अंतिम तिथि 21 सितंबर 2025 है, इसलिए इच्छुक उम्मीदवार जल्द से जल्द आवेदन कर लें। हालांकि वैकेंसी की कुल संख्या अभी साझा नहीं की गई है, लेकिन ये अवसर बैंकिंग सेक्टर में सरकारी नौकरी की चाह रखने वालों के लिए बड़ा मौका साबित होगा।

शैक्षणिक योग्यता और आयु सीमा

ऑफिसर स्केल I (असिस्टेंट मैनेजर): इस पद के लिए उम्मीदवार की आयु 18 से 30 वर्ष के बीच होनी चाहिए। किसी भी विषय में बैचलर डिग्री आवश्यक है।

ऑफिसर स्केल II (जनरल बैंकिंग ऑफिसर): उम्र सीमा 21 से 32 वर्ष है। किसी भी विषय में बैचलर डिग्री, कम से कम 50% अंकों के साथ। प्राथमिकता कृषि व तकनीकी विषयों में डिग्रीधारकों को दी जाएगी।

ऑफिसर स्केल II (स्पेशलिस्ट ऑफिसर): जैसे आईटी ऑफिसर के लिए संबंधित विषयों में बैचलर डिग्री और प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में प्रमाणपत्र आवश्यक है। चार्टर्ड अकाउंटेंट और लॉ ऑफिसर के लिए भी निर्धारित योग्यताएं हैं।

ऑफिसर स्केल III (सीनियर मैनेजर): 21 से 40 वर्ष की आयु सीमा के साथ किसी भी विषय में 50% अंकों के साथ बैचलर डिग्री और बैंकिंग या वित्तीय संस्था में 5 साल का अनुभव जरूरी है।

ऑफिस असिस्टेंट (मल्टीपर्पस): किसी भी विषय में बैचलर डिग्री, स्थानीय भाषा का ज्ञान और कंप्यूटर की बेसिक जानकारी अनिवार्य है।

परीक्षा का शेड्यूल

IBPS ने परीक्षा प्रक्रिया का समय-सारणी भी जारी कर दिया है। प्री-एग्जाम ट्रेनिंग नवंबर 2025 में होगी। प्रीलिम्स परीक्षा नवंबर-दिसंबर 2025 में आयोजित होगी, जिसका परिणाम जनवरी 2026 में आएगा। मेन्स परीक्षा फरवरी 2026 में होगी, जबकि ग्रुप ए के लिए इंटरव्यू जनवरी-फरवरी 2026 के बीच होंगे।

आवेदन शुल्क

ऑफिसर पदों के लिए: SC/ST/PwBD उम्मीदवारों के लिए ₹175 और अन्य के लिए ₹850। जबकि ऑफिस असिस्टेंट के लिए: SC/ST/PwBD/ESM/DESM उम्मीदवारों के लिए ₹175 और अन्य के लिए ₹850 निर्धारित किया गया हैं।

सख्ती शुरू: यूपी में आज से हेलमेट नहीं तो पेट्रोल नहीं

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने सड़क सुरक्षा को लेकर एक कड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। राज्य भर में 1 सितंबर से ‘नो हेलमेट, नो फ्यूल’ अभियान शुरू हो चुका है, जिसके तहत यदि बाइक चालक हेलमेट नहीं पहनेंगे तो उन्हें पेट्रोल पंप पर ईंधन नहीं दिया जाएगा। यह अभियान 30 सितंबर तक पूरे प्रदेश के जिला स्तर पर डीएम के नेतृत्व में जिला सड़क सुरक्षा समिति (डीआरएससी) के समन्वय में संचालित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस अभियान की शुरुआत के पीछे के मकसद को साफ करते हुए कहा है कि इसका उद्देश्य दंडित करना नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक को कानून का पालन करने के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने आम जनता से अपील की है कि सड़क सुरक्षा को गंभीरता से लें, क्योंकि हेलमेट पहनना केवल एक नियम नहीं बल्कि अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा का अधिकार है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा, “पहले हेलमेट, बाद में ईंधन।”

परिवहन आयुक्त ब्रजेश नारायण सिंह ने पेट्रोल पंप संचालकों से इस अभियान में सहयोग की अपील करते हुए कहा कि हेलमेट पहनने की आदत जल्दी ही बाइक चालकों में जागरूकता और सुरक्षा को बढ़ावा देती है। उन्होंने बताया कि खाद्य एवं रसद विभाग की टीम पेट्रोल पंपों पर निगरानी रखेगी ताकि अभियान प्रभावी ढंग से लागू हो और नियमों का उल्लंघन न हो।

बता दें की यह पहल खासतौर पर उन बाइक चालकों के लिए है, जो हेलमेट पहनने में लापरवाही बरतते हैं। ‘नो हेलमेट, नो फ्यूल’ अभियान से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सड़क पर नियमों का सख्ती से पालन हो और दुर्घटनाओं की संख्या में कमी आए।

यूपी सरकार का यह कदम सड़क सुरक्षा को लेकर जागरूकता फैलाने के साथ-साथ सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली जान-माल की हानि को रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। उम्मीद है कि इस अभियान के माध्यम से प्रदेश के लोग नियमों का सम्मान करेंगे और सुरक्षित सवारी को अपनी आदत बनाएंगे।

यूपी के 20+ जिलों से नया एक्सप्रेस-वे, नागरिकों के लिए बड़ी खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सड़क परिवहन के क्षेत्र में एक और बड़ी पहल शुरू होने जा रही है। प्रदेश को एक नई हाई-स्पीड एक्सप्रेसवे का तोहफा मिलने वाला है, जो शामली से गोरखपुर तक 750 किलोमीटर की लंबाई में फैला होगा। यह एक्सप्रेसवे न केवल उत्तर प्रदेश के 22 जिलों को जोड़ने वाला है, बल्कि हरियाणा के पानीपत को भी शामली से जोड़कर एक व्यापक औद्योगिक और आर्थिक कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाएगा। इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 35,000 करोड़ रुपये है।

परियोजना का मार्ग और लाभ

शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे का शुभारंभ थानाभवन के गोगवान जलालपुर गांव से होगा और यह सीधे गोरखपुर तक पहुंचेगा। इस मार्ग में मेरठ, बिजनौर, अमरोहा, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, सीतापुर, बहराइच, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर सहित कुल 22 जिले और 36 तहसील शामिल होंगी। यह एक्सप्रेसवे गंगा एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और लखनऊ-गोरखपुर एक्सप्रेसवे के साथ जुड़कर उत्तर प्रदेश की सड़क परिवहन व्यवस्था को और भी मजबूत बनाएगा।

इससे प्रदेश के विभिन्न हिस्सों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी, जिससे यात्रा का समय और खर्च दोनों कम होंगे। उद्योग, व्यापार, कृषि उत्पादकता के साथ-साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। विशेषकर, हरियाणा के पानीपत से शामली और फिर गोरखपुर तक का कॉरिडोर बनने से दो राज्यों के आर्थिक रिश्ते और भी सशक्त होंगे।

परियोजना की वर्तमान स्थिति और आगे की राह

प्राधिकरण ने इस प्रोजेक्ट के लिए ड्रोन सर्वेक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। दिवाली तक डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) भी तैयार हो जाएगी। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जल्द ही शुरू होगी। यह योजना न केवल क्षेत्रीय विकास को गति देगी, बल्कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों को जोड़ते हुए सामाजिक-आर्थिक समृद्धि का पुल भी बनेगी।

चीन में SCO की मीटिंग: भारत समेत 10 देश सदस्य

नई दिल्ली। चीन के तियानजिन शहर में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की एक बड़ी बैठक का आयोजन शुरू हो चुका है, जिसमें भारत, चीन, रूस समेत कुल 10 सदस्य देश हिस्सा ले रहे हैं। यह बैठक न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक सहयोग के मुद्दों पर चर्चा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि वैश्विक बहुपक्षवाद और सहयोग की नई राह भी खोलने वाली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बैठक के प्लेनरी सेशन को संबोधित करेंगे, इसके बाद रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से उनकी अहम मुलाकात भी होने वाली है, जो इस सम्मेलन की महत्ता को और बढ़ाती है।

SCO की क्या है भूमिका और इसका महत्व?

शंघाई सहयोग संगठन की स्थापना 2001 में हुई थी, जिसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक, और सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देना है। चीन, भारत, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, ईरान, उज्बेकिस्तान, ताजिकिस्तान और बेलारूस इसके प्रमुख सदस्य हैं। यह संगठन क्षेत्रीय शांति, आतंकवाद, उग्रवाद, और अस्थिरता को कम करने के लिए मिलकर काम करता है। खासकर आज के वैश्विक परिदृश्य में, जहां सुरक्षा चुनौतियां और आर्थिक प्रतिस्पर्धा तेज हो रही हैं, SCO का महत्व और भी बढ़ गया है।

भारत की भागीदारी और रणनीतिक दृष्टिकोण

भारत SCO का सक्रिय सदस्य है और इसे अपनी क्षेत्रीय और वैश्विक नीति के लिए एक महत्वपूर्ण मंच मानता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस बैठक में मौजूदगी और उनके संबोधन से यह स्पष्ट होगा कि भारत कैसे SCO के माध्यम से क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत कर सकता है। भारत आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाता है और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए SCO को एक प्रभावी मंच मानता है। इसके अलावा, भारत आर्थिक और तकनीकी सहयोग के क्षेत्रों में भी अपने सहयोग को बढ़ाना चाहता है।

तियानजिन बैठक के एजेंडे पर नजर

इस बार की बैठक में आतंकवाद, आर्थिक पुनर्बलन, ऊर्जा सहयोग, कोविड-19 महामारी के बाद पुनरुद्धार, डिजिटल अर्थव्यवस्था और जलवायु परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे चर्चा के केंद्र में हैं। इसके अलावा, सदस्य देशों के बीच सीमा सुरक्षा, सामरिक सहयोग और व्यापारिक समझौतों को भी मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।

भारत-रूस वार्ता की भूमिका

प्रधानमंत्री मोदी की रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से होने वाली मुलाकात SCO के सत्र के बाद दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय रिश्तों को और गहरा करने का अवसर होगी। दोनों देश आर्थिक, सुरक्षा और वैश्विक राजनीतिक मुद्दों पर आपसी सहयोग को और बढ़ाने की संभावना रखते हैं।

बिहार में युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी, जल्दी पढ़ें!

पटना। बिहार में शिक्षक बनने का सपना देखने वाले हजारों युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण अपडेट आया है। राज्य सरकार और शिक्षा विभाग ने विद्यालय अध्यापक नियुक्ति परीक्षा (टीआरई) के चौथे चरण से पहले राज्य शिक्षक पात्रता परीक्षा (एसटीईटी) कराने की प्रक्रिया को लेकर चर्चा तेज कर दी है। यह परीक्षा शिक्षा विभाग की तैयारी के अनुसार अब बहुत जल्द आयोजित की जा सकती है, जिससे टीआरई-4 में पदों के लिए योग्य उम्मीदवारों का चयन संभव होगा।

टीआरई-4 और एसटीईटी की स्थिति

टीआरई-4, जिसमें लगभग 50 हजार पदों पर नियुक्ति की संभावना है, के पहले एसटीईटी आयोजित करने की मांग अभ्यर्थियों द्वारा काफी समय से की जा रही है। हालांकि, सरकार ने पहले स्पष्ट किया था कि टीआरई-4 से पहले एसटीईटी नहीं होगी और यह परीक्षा टीआरई-5 से पहले कराई जाएगी। लेकिन हाल ही में मुख्य सचिव के निर्देश पर इस विषय पर पुनः विचार किया जा रहा है। राजधानी में अभ्यर्थियों द्वारा भी दो बार मार्च किया जा चुका है, जो इस परीक्षा के महत्व को दर्शाता है।

शिक्षा विभाग ने उच्च स्तर पर इस मामले में विमर्श शुरू कर दिया है और सरकार के उच्च स्तरीय सलाह के आधार पर बीएसईबी को फिर से सलाह भेजी जाएगी कि टीआरई-4 के पहले एसटीईटी कराई जाए या नहीं। इससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य सरकार शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और समयानुकूल बनाने के लिए गंभीर प्रयास कर रही है।

एसटीईटी की पात्रता और नियम

बीएसईबी द्वारा आयोजित एसटीईटी परीक्षा में सफल होना उच्च माध्यमिक और माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षक बनने के लिए अनिवार्य है। इस परीक्षा के दो पेपर होते हैं: पेपर 1: कक्षा 9 और 10 के शिक्षक बनने के लिए। पेपर 2: कक्षा 11 और 12 के उच्च माध्यमिक शिक्षक बनने के लिए।

इस परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिए सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को कम से कम 50 प्रतिशत अंक प्राप्त करना आवश्यक है, जबकि एससी, एसटी, पिछड़ा वर्ग, अत्यंत पिछड़ा वर्ग, दिव्यांग और महिलाओं को न्यूनतम 45 प्रतिशत अंक लाना होता है।  पात्रता के लिए स्नातक में 50 प्रतिशत अंक के साथ बीएड होना जरूरी है। कक्षा 11 और 12 के लिए स्नातकोत्तर में 50 प्रतिशत अंक के साथ एसटीईटी पेपर 2 उत्तीर्ण करना अनिवार्य है।

आगामी प्रक्रिया और युवाओं के लिए संदेश

जैसे-जैसे टीआरई-4 का आयोजन नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे एसटीईटी परीक्षा को लेकर अंतिम फैसला शीघ्र ही लिया जाएगा। यह परीक्षा बिहार के युवाओं के लिए रोजगार का एक बड़ा अवसर लेकर आएगी। इससे न केवल योग्य शिक्षक मिलेंगे बल्कि शिक्षा व्यवस्था भी मजबूत होगी। जो युवा शिक्षक बनने का सपना देख रहे हैं, उन्हें सलाह दी जाती है कि वे अपनी तैयारी को और मजबूत करें और सभी आधिकारिक घोषणाओं पर नजर बनाए रखें।

1 मंत्र और 108 फायदे: सोमवार को करें जाप!

धर्म डेस्क: सोमवार को भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। माना जाता है कि इस दिन शिवजी का ध्यान और जाप करने से व्यक्ति के जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। आज हम आपके लिए लेकर आए हैं एक ऐसा सरल लेकिन शक्तिशाली मंत्र, जिसका जाप सोमवार को करने से 108 प्रकार के लाभ होते हैं।

मंत्र:

“ॐ नमः शिवाय”

यह मंत्र भगवान शिव का पंचाक्षर मंत्र है, जो उनकी अनंत शक्तियों का प्रतीक माना जाता है। यह मंत्र मन, शरीर और आत्मा को शुद्ध करता है और जीवन की नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है। इसलिए सोमवार के दिन इस मंत्र का जाप कर सकते हैं।

सोमवार का महत्व:

हिन्दू धर्म में सोमवार को भगवान शिव को समर्पित दिन माना जाता है। इस दिन उपवास और जाप करने से शिवजी की कृपा प्राप्त होती है। यह दिन नए कार्य शुरू करने, मन की शांति पाने और आत्मिक विकास के लिए सबसे उपयुक्त दिन है।

108 फायदे:

यह कहा जाता है कि “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का 108 बार जाप करने से निम्नलिखित लाभ होते हैं: मानसिक तनाव और चिंता में कमी, स्वास्थ्य में सुधार और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ना, आर्थिक समृद्धि और नौकरी में सफलता, पारिवारिक जीवन में सुख-शांति, बुरी नजर और नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा, आध्यात्मिक उन्नति और आत्म-साक्षात्कार, अवसाद और नकारात्मक भावनाओं का नाश, प्रेम संबंधों में मजबूती, मनोबल और आत्मविश्वास में वृद्धि, जीवन में सकारात्मक बदलाव और खुशहाली और भी कई अनगिनत फायदे जो जीवन के हर क्षेत्र में आपके लिए वरदान साबित हो सकते हैं।

कैसे करें जाप:

सोमवार सुबह स्नान के बाद एक साफ स्थान पर बैठें। मन को शांत कर “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें। ध्यान रखें कि मन पूरी तरह से मंत्र में लगा रहे। जाप के दौरान किसी भी प्रकार की नकारात्मकता से बचें। जप करते समय रुद्राक्ष की माला का उपयोग करने से लाभ और भी बढ़ जाते हैं।

यूपी के इस जिले में 2 दिन बंद रहेंगे स्कूल, आदेश जारी

पीलीभीत। उत्तर प्रदेश के कई जिलों में जारी भारी बारिश ने जनजीवन को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। इसी कड़ी में पीलीभीत जिले में भी बीते कई दिनों से हो रही तेज बारिश ने हालात बिगाड़ दिए हैं। जलभराव की स्थिति ने आमजन की रोजमर्रा की ज़िंदगी को थामकर रख दिया है। सड़कें पानी से लबालब हैं, गलियां तालाब बन चुकी हैं और लोगों का घरों से निकलना भी मुश्किल हो गया है।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी (डीएम) ज्ञानेंद्र सिंह ने बड़ा फैसला लेते हुए दो दिनों के लिए स्कूल और कॉलेजों को बंद रखने का आदेश जारी किया है। यह आदेश सोमवार (1 सितंबर) और मंगलवार (2 सितंबर) को लागू रहेगा।

कक्षा 1 से 12वीं तक के सभी स्कूल रहेंगे बंद

डीएम के निर्देश के अनुसार, जिले के सभी परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों, सहायता प्राप्त स्कूलों, तथा सभी बोर्डों से मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों और इंटर कॉलेजों को दो दिनों के लिए बंद किया गया है। यह निर्णय छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, ताकि वे जलभराव और बारिश के चलते किसी भी तरह की परेशानी या दुर्घटना का शिकार न हों।

रेड अलर्ट जारी, प्रशासन सतर्क

मौसम विभाग की चेतावनी के अनुसार जिले में रेड अलर्ट घोषित किया गया है। आने वाले दिनों में और भी भारी बारिश की संभावना जताई गई है। इसके मद्देनज़र प्रशासन ने न केवल स्कूलों को बंद करने का आदेश दिया है, बल्कि आमजन को भी सतर्क रहने की सलाह दी है।

डीएम ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि, "जिले में लगातार हो रही भारी वर्षा और जलभराव को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। हम हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं, और जरूरत पड़ने पर छुट्टी को आगे भी बढ़ाया जा सकता है।"

जनजीवन प्रभावित, घर से निकलने में भी परेशानी

पीलीभीत जिले के कई इलाकों में सड़कों पर पानी भर गया है। नालों का पानी सड़कों पर फैल चुका है, जिससे लोगों का पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। स्कूल जाने वाले बच्चों और शिक्षकों को आने-जाने में दिक्कत न हो, इसी उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है।

यूपी में आज से बड़ा अभियान, सभी जिलों में लागू!

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने सड़क सुरक्षा को लेकर एक बड़ा और जनहितकारी कदम उठाया है। एक सितंबर 2025 से पूरे प्रदेश में एक विशेष अभियान शुरू किया गया है, जिसके तहत बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चालकों को पेट्रोल नहीं दिया जाएगा। इस नियम का उद्देश्य स्पष्ट है, सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों और गंभीर चोटों को कम करना।

सुरक्षा से कोई समझौता नहीं

राज्य के परिवहन आयुक्त बी.एन. सिंह ने स्पष्ट किया कि यह अभियान पूर्णतः सार्वजनिक हित में है और इसका मकसद किसी को परेशान करना नहीं, बल्कि लोगों को सुरक्षित बनाना है। आंकड़ों की बात करें तो देश में हर साल हजारों लोग सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवाते हैं, जिनमें सबसे ज्यादा प्रभावित दोपहिया वाहन चालक होते हैं। इनमें भी अधिकांश मौतें सिर पर चोट लगने की वजह से होती हैं, जो कि एक साधारण हेलमेट से रोकी जा सकती थीं।

पेट्रोल पंप पर होगी सख्ती

IOCL, BPCL और HPCL सहित सभी प्रमुख तेल विपणन कंपनियों से सहयोग मांगा गया है, ताकि राज्य के हर कोने में यह नियम प्रभावी रूप से लागू हो। पेट्रोल पंप संचालकों को निर्देश दिया गया है कि वह बिना हेलमेट आए किसी भी ग्राहक को पेट्रोल न दें। इसकी निगरानी खाद्य एवं रसद विभाग के माध्यम से की जाएगी, जबकि सूचना एवं जनसंपर्क विभाग इस अभियान की जागरूकता को फैलाने का काम करेगा।

मोटर वाहन अधिनियम का पालन अनिवार्य

मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 129 के अनुसार दोपहिया वाहन चालक और पीछे बैठने वाले व्यक्ति के लिए हेलमेट पहनना अनिवार्य है। वहीं, अगर कोई इस नियम का उल्लंघन करता है, तो धारा 194D के तहत उसे दंडित किया जा सकता है। यह नियम केवल कानून का पालन कराने के लिए नहीं, बल्कि जीवन की रक्षा के लिए बनाया गया है।

सिर्फ नियम नहीं, सामाजिक ज़िम्मेदारी

इस अभियान के माध्यम से योगी सरकार ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि सड़क सुरक्षा सिर्फ प्रशासन की नहीं, हम सभी की जिम्मेदारी है। पुलिस, परिवहन विभाग, राजस्व प्रशासन, नागरिक समाज और उद्योग जगत  सभी को मिलकर इस प्रयास को सफल बनाना होगा।

तूफानी बारिश का तांडव! यूपी के 44 जिलों में अलर्ट

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में एक बार फिर मानसून ने रफ्तार पकड़ ली है। मौसम विभाग की ताज़ा चेतावनी के अनुसार, राज्य के विभिन्न हिस्सों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश की संभावना है। खासकर 31 अगस्त से 2 सितंबर के बीच बारिश का जोर पूरे प्रदेश में महसूस किया जाएगा। इसको लेकर मौसम विभाग ने कई जिलों में अलर्ट जारी किया है, जिससे लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

15 जिलों में ऑरेंज अलर्ट

राज्य के जिन जिलों में सबसे ज्यादा बारिश होने की आशंका है, वहां ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। लखीमपुर खीरी, सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, बागपत, मेरठ, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर, संभल और बदायूं जैसे जिलों में तेज़ बारिश के साथ बाढ़ जैसे हालात बन सकते हैं। इन इलाकों के निवासियों को सावधानी बरतने और प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है।

29 जिलों में भारी बारिश का येलो अलर्ट

इसके अलावा 29 अन्य जिलों में भी भारी बारिश की चेतावनी दी गई है, जहां येलो अलर्ट लागू किया गया है। इनमें लखनऊ, प्रयागराज, चित्रकूट, कानपुर नगर, रायबरेली, गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, अमेठी, मैनपुरी, अलीगढ़ समेत कई प्रमुख जिले शामिल हैं। गरज-चमक के साथ तेज़ हवाएं और वज्रपात की संभावना भी जताई गई है, जिससे सावधानी बरतना आवश्यक हो गया है।

मौसम प्रणाली: क्यों बढ़ी बारिश की तीव्रता?

लखनऊ स्थित आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों के अनुसार, उत्तरी पाकिस्तान और पंजाब क्षेत्र में सक्रिय चक्रवाती सिस्टम के कारण पश्चिमी विक्षोभ ने प्रभाव दिखाना शुरू कर दिया है। इसका सीधा असर उत्तर भारत की मानसूनी रेखा पर पड़ा है, जो अब उत्तर की ओर खिसक गई है। यही बदलाव प्रदेश में लगातार वर्षा की स्थिति बना रहा है।

सितंबर में सामान्य से अधिक बारिश के संकेत

मौसम विभाग ने यह भी संकेत दिया है कि सितंबर महीने में प्रदेश भर में सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है। अगस्त में भी पूरे प्रदेश में औसतन सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई, पश्चिमी यूपी में सामान्य से 4% और पूर्वी यूपी में 1% अधिक। ये आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि इस बार मानसून अपेक्षा से अधिक सक्रिय है।

बिहार में ये 5 एयरपोर्ट होंगे चालू, नागरिकों के लिए बड़ी खुशखबरी

पटना। बिहार के विकास के नक्शे पर एक नई रेखा खिंचने जा रही है। राज्य में पांच हवाई अड्डों को चालू करने की प्रक्रिया तेज़ हो गई है, जिससे नागरिकों को हवाई यात्रा की सुविधा के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नया संबल मिलेगा। विशेष रूप से सीमांचल और कोसी क्षेत्र के लिए यह एक बड़ी सौगात मानी जा रही है। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) की ओर से इन हवाई अड्डों के सर्वे का कार्यक्रम तय कर दिया गया है।

वीरपुर और सहरसा में 20 सीटर विमान सेवा की संभावना

सुपौल जिले के वीरपुर और सहरसा जिले में छोटे विमानों की सेवा शुरू करने को लेकर गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं। AAI की विशेष तकनीकी टीम 8 से 23 सितंबर के बीच इन दोनों हवाई अड्डों का ऑब्स्ट्रक्शन लिमिटेशन सर्वे करेगी। इस सर्वे का मुख्य उद्देश्य यह है कि विमान संचालन में कोई बाधा तो नहीं है, और अगर है तो उसे कैसे दूर किया जा सकता है।

गौरतलब है कि इससे पहले 23 मई को AAI की एक छह सदस्यीय टीम ने वीरपुर एयरपोर्ट का गहन निरीक्षण किया था। करीब डेढ़ घंटे की जांच में टीम ने रनवे की लंबाई, चौड़ाई और उसकी हालत को परखा। साथ ही, यह सुझाव भी दिया कि यदि वर्तमान रनवे तकनीकी दृष्टि से उपयुक्त नहीं पाया गया, तो नया रनवे बनाया जा सकता है।

अन्य हवाई अड्डों का भी होगा सर्वे

एयरपोर्ट अथॉरिटी की तीन टीमों को अलग-अलग हवाई अड्डों के सर्वेक्षण का जिम्मा सौंपा गया है ताकि इन सभी एयरपोर्ट को लागू किया जा सकें।

पहली टीम:

2 से 9 सितंबर - भागलपुर (ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट)

10 से 18 सितंबर - मुंगेर (सफियाबाद एयरपोर्ट)

दूसरी टीम:

8 से 15 सितंबर - वीरपुर

16 से 23 सितंबर - सहरसा

तीसरी टीम:

22 से 28 सितंबर - वाल्मीकिनगर

पृष्ठभूमि और संभावनाएं

लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान वीरपुर हवाई अड्डे पर एयर एंबुलेंस की लैंडिंग की गई थी। उस समय सामने आई तकनीकी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए हाल ही में लगभग 5 करोड़ रुपये की लागत से रनवे का जीर्णोद्धार किया गया है। यह संकेत है कि भविष्य में यहां नियमित विमान सेवा शुरू हो सकती है।

यदि सब कुछ योजना के अनुसार चला, तो जल्द ही इन क्षेत्रों से 20 सीटर विमानों की सेवा शुरू हो सकती है। इससे पटना या अन्य महानगरों तक सीधी पहुंच संभव होगी, जो शिक्षा, चिकित्सा और व्यापार के क्षेत्र में एक बड़ा परिवर्तन ला सकता है।

बिहार में छात्रों के लिए बड़ी खुशखबरी, छात्रवृत्ति के लिए आवेदन!

पटना। बिहार के छात्रों के लिए शिक्षा क्षेत्र से एक बेहद राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने उन विद्यार्थियों के लिए एक और मौका दिया है जो अब तक छात्रवृत्ति या प्रोत्साहन योजनाओं के लिए आवेदन नहीं कर सके थे। बिहार शिक्षा विभाग ने कक्षा 10वीं पास छात्रों के लिए विभिन्न स्कॉलरशिप योजनाओं के आवेदन की अंतिम तिथि को बढ़ाकर अब 15 सितंबर 2025 कर दिया है।

किसे मिलेगा इस पहल का लाभ?

यह सुविधा उन छात्रों के लिए है जिन्होंने बिहार बोर्ड से 10वीं की परीक्षा वर्ष 2022, 2023 या 2024 में पास की है। पात्रता की शर्तें निम्न प्रकार हैं। सामान्य, पिछड़ा और अत्यंत पिछड़ा वर्ग के वे छात्र जिन्होंने प्रथम श्रेणी से परीक्षा उत्तीर्ण की है। एससी (SC) और एसटी (ST) वर्ग के वे छात्र जो द्वितीय श्रेणी से पास हुए हैं। इन छात्रों को राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।

कौन-सी योजनाएं हैं शामिल?

इस विस्तारित तिथि के तहत निम्न योजनाओं का लाभ उठाया जा सकता है: मुख्यमंत्री कन्या उत्थान प्रोत्साहन योजना, मुख्यमंत्री विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना, मुख्यमंत्री पिछड़ा / अत्यंत पिछड़ा वर्ग मेधावी छात्रवृत्ति योजना, मुख्यमंत्री अनुसूचित जाति / जनजाति मेधावी छात्रवृत्ति योजना। इन योजनाओं के माध्यम से छात्रों को आर्थिक मदद दी जाती है ताकि वे आगे की पढ़ाई में कोई रुकावट महसूस न करें।

आवेदन की प्रक्रिया क्या है?

छात्रवृत्ति के लिए आवेदन करना पूरी तरह ऑनलाइन प्रक्रिया है। इसके लिए छात्रों को बिहार सरकार के MedhaSoft पोर्टल medhasoft.bihar.gov.in पर आवेदन करना होगा।

आवेदन की अंतिम तिथि

शिक्षा विभाग ने यह स्पष्ट किया है कि 15 सितंबर 2025 के बाद किसी को भी अतिरिक्त मौका नहीं दिया जाएगा। यदि कोई पात्र छात्र इस अवधि में आवेदन नहीं करता है, तो यह मान लिया जाएगा कि वह योजना का लाभ नहीं लेना चाहता।

बरसात से भीगेगा बिहार! 4 सितंबर तक नहीं थमेगा पानी

पटना। बिहार में मौसम ने फिर से करवट ली है और चार सितंबर तक राज्य के सभी जिलों में बारिश और वज्रपात की संभावना बनी हुई है। मौसम विभाग ने इसके मद्देनजर पूरे प्रदेश में सतर्कता बढ़ा दी है। बारिश का यह दौर खासतौर पर पूर्वी और पश्चिमी चंपारण, सीवान, सारण, और गोपालगंज जिलों में अधिक सक्रिय रहने की संभावना है, जहां यलो अलर्ट जारी किया गया है।

मौसम का वैज्ञानिक कारण

मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, उत्तर-पूर्वी असम और आसपास के क्षेत्रों में औसतन समुद्र तल से 1.5 किलोमीटर ऊपर एक चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय है, जो बिहार में बारिश के बने रहने का प्रमुख कारण है। इस परिसंचरण के चलते अगले पांच दिनों तक राज्य के अधिकतर हिस्सों में बारिश और आंधी-तूफान का खतरा बना रहेगा।

बारिश से प्रभावित जिले

चार सितंबर तक बिहार के लगभग हर जिले में कहीं न कहीं बारिश हो सकती है। खास तौर पर सीतामढ़ी, मधुबनी, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, वैशाली, शिवहर, समस्तीपुर, सुपौल, अररिया, किशनगंज, मधेपुरा, सहरसा, पूर्णिया, कटिहार, बक्सर, भोजपुर, रोहतास, भभुआ, औरंगाबाद, अरवल, पटना, गया, नालंदा, शेखपुरा, नवादा, बेगूसराय, लखीसराय, जहानाबाद, भागलपुर, बांका, जमुई, मुंगेर और खगड़िया जिलों में कुछ स्थानों पर तेज बारिश और वज्रपात की आशंका बनी हुई है।

सावधानी बरतने की जरूरत

बारिश और वज्रपात के चलते जलभराव और बिजली गिरने जैसी घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए लोगों को मौसम विभाग द्वारा जारी अलर्ट को गंभीरता से लेना चाहिए। खासकर ग्रामीण और नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जाती है। सड़क मार्ग और जलमार्ग पर यात्रा करते समय सावधानी बरतनी होगी। किसानों को भी अपने खेतों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने चाहिए, ताकि फसलों को नुकसान न पहुंचे।

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण अपडेट, तुरंत पढ़ें!

नई दिल्ली। केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनधारकों के लिए CGHS यानी सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम एक ऐसी सुविधा है जो स्वास्थ्य सेवा का अहम स्तंभ बनी हुई है। पिछले दस सालों में इस योजना में काफी सुधार हुए हैं, खासकर 7वें वेतन आयोग के दौरान, जब इसे डिजिटल और आसान बनाने पर खास ध्यान दिया गया। अब जबकि 8वें वेतन आयोग की तैयारी चल रही है, कर्मचारियों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या CGHS को पूरी तरह बदलकर कोई नई इंश्योरेंस आधारित योजना लायी जाएगी।

CGHS में हुए सुधारों की झलक

कुछ वर्षों में CGHS ने कई नई सुविधाएं दी हैं। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि कर्मचारियों की बेसिक सैलरी के आधार पर अस्पतालों में वार्ड की कैटेगरी तय की जाती है। इससे कर्मचारियों को अपनी जरूरत और सुविधा के अनुसार इलाज का विकल्प मिलता है।

डिजिटल क्रांति और 2025 के नियम

इस साल CGHS ने डिजिटल प्लेटफॉर्म को और मजबूत किया है। मेडिकल उपकरणों की मंजूरी पूरी तरह ऑनलाइन होने लगी है। पेमेंट सिस्टम में भी HMIS पोर्टल को लागू किया गया है, जिससे सभी भुगतान डिजिटल माध्यम से होते हैं। MyCGHS ऐप की मदद से कार्ड ट्रांसफर, डिपेंडेंट्स जोड़ना जैसे काम घर बैठे किए जा सकते हैं। अब मरीज की फोटो केवल अस्पताल में भर्ती और छुट्टी के समय ही जरूरी होगी। फिजियोथेरेपी सेवा को घर तक पहुंचाने की सुविधा भी शुरू की गई है, जिससे मरीजों को बड़ी मदद मिली है।

8वें वेतन आयोग से क्या उम्मीदें हैं?

8वें वेतन आयोग की घोषणा हो चुकी है, लेकिन इसकी टीम का गठन अभी बाकी है। इसलिए सैलरी और पेंशन में बदलाव अगले कुछ वर्षों में ही संभव है। हालांकि आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से लागू मानी जाएंगी। इस बीच चर्चा है कि CGHS की जगह एक नई इंश्योरेंस आधारित योजना, CGEPHIS, लाई जा सकती है, जो स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाएगी। कर्मचारियों की मांग है कि नई योजना लागू होने तक CS(MA) और ECHS अस्पतालों को CGHS में शामिल किया जाए।

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बड़ा एलान, जानिए क्या होगा नया!

नई दिल्ली। अगर आप केंद्रीय सरकार में काम करते हैं या पहले करते थे और अपनी पेंशन को लेकर सोच रहे हैं, तो आपके लिए एक बड़ी खबर आई है। सरकार ने पेंशन योजनाओं में बदलाव करते हुए एक नया नियम लागू किया है, जो आपके पेंशन फंड से जुड़ी योजनाओं में स्विच करने के तरीके को पूरी तरह बदल सकता है।

क्या है नई व्यवस्था?

सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब कर्मचारी यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) से नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में या इसके विपरीत स्विच करने का मौका सिर्फ एक बार पाएंगे। यानी एक बार जब आप UPS से NPS में चले जाएंगे, तो वापस UPS में वापसी का विकल्प नहीं मिलेगा। यह सुविधा केवल उन्हीं कर्मचारियों के लिए है जिन्होंने पहले UPS को चुना हुआ है।

स्विचिंग का समय और शर्तें

यह बदलाव रिटायरमेंट से पहले एक निश्चित समय सीमा में ही किया जा सकता है। कर्मचारी अपनी सेवानिवृत्ति की तारीख से एक साल पहले तक इस ऑप्शन का लाभ उठा सकते हैं। वहीं, जो कर्मचारी वॉलंटरी रिटायरमेंट लेना चाहते हैं, उन्हें रिटायरमेंट से तीन महीने पहले तक यह निर्णय लेना होगा। ध्यान रहे कि उन कर्मचारियों के लिए यह सुविधा उपलब्ध नहीं होगी जिनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई चल रही है या जो नौकरी से हटाए जा रहे हैं।

UPS और NPS: दोनों में क्या फर्क?

यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) एक ऐसी योजना है जिसे सरकार ने अप्रैल 2025 से लागू किया है, जिसमें कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद निश्चित पेंशन दी जाती है। वहीं, नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) बाजार आधारित योजना है, जहां पेंशन की राशि निवेश के प्रदर्शन पर निर्भर करती है। इसलिए, NPS में रिटर्न अधिक हो सकता है, लेकिन यह निश्चित नहीं होता। सरकार ने अब कर्मचारियों को यह विकल्प दिया है कि वे अपनी जरूरत के अनुसार तय कर सकें कि उन्हें स्थिर पेंशन चाहिए या निवेश आधारित पेंशन योजना में जाना है।

सरकार का योगदान और कर्मचारियों को मिलने वाले फायदे

जो कर्मचारी UPS छोड़कर NPS में आते हैं, उन्हें UPS के तहत सरकार का 4% अतिरिक्त योगदान भी NPS फंड में मिलेगा। दोनों योजनाओं में टैक्स संबंधी लाभ भी प्रदान किए गए हैं। UPS चुनने वाले कर्मचारियों को रिटायरमेंट और डेथ ग्रैच्युटी जैसे अतिरिक्त फायदे भी मिलते हैं। यदि किसी कर्मचारी की नौकरी के दौरान मृत्यु हो जाती है या वह विकलांग हो जाता है, तो उसे CCS पेंशन नियम 2021 या Extraordinary Pension Rules 2023 के तहत सुरक्षा लाभ मिलते हैं।

अमेरिका या चीन? भारत के लिए असली फायदा किसके साथ?

नई दिल्ली। वैश्विक राजनीति और आर्थिक रिश्तों की बिसात पर भारत एक ऐसा खिलाड़ी है जो अब सिर्फ़ चाल नहीं चलता, बल्कि चालों को दिशा भी देने लगा है। लेकिन इस नई ताक़त के साथ एक बड़ा सवाल खड़ा होता है की भारत को अपने रणनीतिक और आर्थिक हितों के लिए अमेरिका के करीब जाना चाहिए या चीन के साथ रिश्तों को फिर से परिभाषित करना चाहिए।

भारत-अमेरिका व्यापारिक रिश्ते क्यों फंसी?

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता लंबे समय से लटका हुआ है। पूर्व वित्त सचिव सुभाष गर्ग ने बताया कि ट्रंप सरकार के 50% तक के एकतरफा टैरिफ ने भारत को वार्ता की मेज से लगभग हटा दिया है। भारत ने भले ही आधिकारिक रूप से बातचीत बंद न की हो, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में कोई प्रगति नहीं हो रही।

इसके साथ ही उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि भारत को कुछ क्षेत्रों जैसे जीएम तेल और डेयरी में अपने रुख पर फिर से विचार करना चाहिए। गर्ग के मुताबिक, इन उत्पादों से भारतीय किसानों को वैसा नुकसान नहीं होता जैसा अक्सर कहा जाता है। उपभोक्ताओं को विकल्प मिलना चाहिए, न कि सख्त प्रतिबंध।

चीन के साथ रिश्तों पर पुनर्विचार की ज़रूरत?

चीन को लेकर भारत की नीति भी अब बहस के घेरे में है। पूर्व वित्त सचिव सुभाष गर्ग का मानना है कि भारत ने रणनीतिक क्षेत्रों में चीनी निवेश को सीमित कर खुद को ही नुकसान पहुँचाया है। उनका कहना है कि भारत सोलर सेल, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रिक बैटरियों के मामले में अभी भी चीन पर निर्भर है और चीन से निवेश लेने से दीर्घकालिक आत्मनिर्भरता को बल मिल सकता है। उनका यह भी तर्क है कि पूरी तरह बहिष्कार की नीति अव्यावहारिक है। चीन और अमेरिका दोनों भारतीय आर्थिक ढांचे में गहराई से समाए हुए हैं। ऐसे में केवल भावनात्मक नारों से दूरगामी नीति नहीं बनाई जा सकती।

अमेरिका का दबाव और भारत की स्थिति क्या है?

जहाँ अमेरिका बार-बार भारत पर दबाव बनाने की कोशिश करता है चाहे वो रूस से तेल खरीद हो या व्यापार समझौता, वहीं भारत ने यह दिखाया है कि वह अब दबाव में झुकने वाला नहीं है। प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया है कि भारत के किसानों और उपभोक्ताओं के हितों से कोई समझौता नहीं होगा। लेकिन साथ ही भारत को यह भी देखना होगा कि वो कब और कहां लचीलापन दिखा सकता है, ताकि वैश्विक साझेदारी मजबूत हो सके।

भारत के लिए अमेरिका और चीन दोनों ही ज़रूरी हैं, एक टेक्नोलॉजी और कूटनीतिक साझेदार के रूप में, तो दूसरा उत्पादन और व्यापार में। भारत को इन दोनों के साथ रिश्ते निभाने हैं, लेकिन अपनी शर्तों पर। अमेरिकी टैरिफ हों या चीनी आयात भारत को न तो घुटना टेकना है, न आंख मूंद लेनी है। रणनीति वही टिकेगी जो व्यावहारिक हो, आत्मनिर्भर भी और वैश्विक रूप से जुड़ी भी।

नाटो vs ब्रिक्स – कौन है सुपरपावर का दावेदार?

नई दिल्ली। दुनिया की बदलती भू-राजनीतिक और आर्थिक परिस्थितियों में दो बड़े अंतरराष्ट्रीय गठबंधन तेजी से चर्चा में हैं, एक ओर है पश्चिमी देशों का मजबूत सैन्य गठबंधन नाटो, तो दूसरी ओर उभरती अर्थव्यवस्थाओं का समूह ब्रिक्स, जो वैश्विक शक्ति संतुलन को पुनर्परिभाषित करने की दिशा में अग्रसर है।

हाल के वर्षों में ब्रिक्स का विस्तार, डॉलर के वर्चस्व को चुनौती, और वैश्विक दक्षिण की आवाज बनने की इसकी कोशिशों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है की आर्थिक मोर्चे पर सुपरपावर बनने की दौड़ में कौन आगे है नाटो या ब्रिक्स?

नाटो: परंपरागत आर्थिक महाशक्ति

नाटो (NATO) की स्थापना 1949 में सुरक्षा गठबंधन के रूप में हुई थी, लेकिन आज इसके सदस्य देश वैश्विक अर्थव्यवस्था के सबसे प्रभावशाली स्तंभ हैं। अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन और कनाडा जैसे देश न केवल सैन्य शक्ति में अग्रणी हैं, बल्कि आर्थिक स्तर पर भी दुनिया के सबसे बड़े निवेशक और बाजार नियंत्रक हैं।

कुल GDP (2025): $47 ट्रिलियन से अधिक

वैश्विक व्यापार में हिस्सा: 45% से भी अधिक 

तकनीकी नवाचार में अग्रणी: AI, रक्षा, हेल्थटेक

ब्रिक्स: उभरती अर्थव्यवस्थाओं की नई शक्ति

ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका से शुरू होकर अब ईरान, यूएई, मिस्र, इथियोपिया जैसे देश भी ब्रिक्स में शामिल हो गए हैं। यह समूह विश्व की लगभग 45% आबादी और 30% से अधिक वैश्विक GDP का प्रतिनिधित्व करता है। ब्रिक्स की सबसे बड़ी ताकत है जनसंख्या, संसाधन, और विकास की गति।

कुल GDP (2025): $29 ट्रिलियन (और बढ़ती हुई)

प्राकृतिक संसाधनों पर पकड़: तेल, गैस, कोयला, दुर्लभ खनिज

विश्व व्यवस्था में बदलाव की आहट

जहां नाटो आज भी वैश्विक वित्तीय संस्थानों (IMF, World Bank, SWIFT) पर नियंत्रण रखता है, वहीं ब्रिक्स ने "New Development Bank" और स्थानीय मुद्रा व्यापार समझौते के ज़रिए एक वैकल्पिक प्रणाली की नींव रख दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यदि ब्रिक्स साझा मुद्रा, तकनीकी विकास और नीति समन्वय में सफल होता है, तो यह पश्चिमी आर्थिक प्रभुत्व को सीधी चुनौती देगा।

झूम उठेंगे 'केंद्रीय कर्मचारी' – DA में 3% बढ़ोतरी संभव!

नई दिल्ली। केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आ रही है। सरकार जुलाई 2025 से महंगाई भत्ते (Dearness Allowance - DA) में 3% की संभावित बढ़ोतरी पर विचार कर रही है। यदि यह प्रस्ताव मंजूर होता है, तो डीए की दर वर्तमान 55% से बढ़कर 58% हो जाएगी। यह बढ़ोतरी 1 जुलाई, 2025 से प्रभावी मानी जाएगी और इसका आधिकारिक ऐलान सितंबर या अक्टूबर 2025 में किया जा सकता है।

यह संशोधन सातवें वेतन आयोग (7th Pay Commission) के तहत अंतिम DA संशोधन होगा, क्योंकि यह आयोग 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त हो रहा है। इसके बाद 8वें वेतन आयोग लागू किया जायेगा। विभाग के स्तर पर इसकी तैयारी की जा रही हैं।

मुख्य बातें संक्षेप में:

डीए में 3% वृद्धि की संभावना - 55% से बढ़कर 58%

प्रभावी तिथि: 1 जुलाई, 2025

घोषणा की संभावित तिथि: सितंबर या अक्टूबर 2025

डीए क्यों है महत्वपूर्ण?

महंगाई भत्ता वह अतिरिक्त राशि होती है जो सरकार अपने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को मुद्रास्फीति (महंगाई) के प्रभाव से बचाने के लिए प्रदान करती है। यह हर छह महीने में संशोधित किया जाता है, और इसकी गणना उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-IW) के आधार पर होती है। जुलाई 2025 से प्रस्तावित 3% बढ़ोतरी, खासतौर पर मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए, कर्मचारियों के वेतन में सीधा इजाफा करेगी और उनकी खरीद क्षमता को मजबूत बनाएगी।

कैसे पड़ेगा असर?

उदाहरण के तौर पर यदि किसी कर्मचारी का मूल वेतन ₹30,000 है, तो वर्तमान में उसे ₹16,500 (55%) डीए मिलता है। डीए 58% होने पर यह राशि बढ़कर ₹17,400 हो जाएगी यानी ₹900 प्रति माह की अतिरिक्त आमदनी। इसी तरह अन्य कर्मचारियों की भी उनके मूल वेतन के अनुसार होगी।

7वें वेतन आयोग का अंतिम चरण

गौरतलब है कि यह अंतिम डीए संशोधन होगा जिसे सातवें वेतन आयोग के अंतर्गत लागू किया जाएगा। इसके बाद अगले वेतन आयोग की नियुक्ति और संरचना पर चर्चा शुरू हो सकती है।

ग्रेजुएट्स के लिए बल्ले-बल्ले, बिहार में बड़ी भर्ती शुरू

पटना। बिहार में ग्रेजुएट उम्मीदवारों के लिए सुनहरा अवसर सामने आया है। बिहार स्टाफ सेलेक्शन कमीशन (BSSC) ने वर्ष 2025 के लिए बड़ी भर्ती प्रक्रिया की घोषणा की है। इस भर्ती के तहत असिस्टेंट ब्रांच ऑफिसर, ऑडिटर सहित विभिन्न विभागों में कुल 1481 पदों पर भर्तियां की जाएंगी।

पद विवरण और योग्यता:

यह भर्ती किसी भी ग्रेजुएशन डिग्रीधारी उम्मीदवारों के लिए है। इसके अलावा, बीसीए, बी.कॉम, बी.एससी, पीजीडीसीए धारक भी आवेदन कर सकते हैं। इसलिए यदि आप ग्रेजुएट हैं और सरकारी नौकरी का सपना देख रहे हैं तो यह मौका आपके लिए उपयुक्त है।

आवेदन की महत्वपूर्ण तिथियां:

ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 18 अगस्त 2025 से शुरू होकर 19 सितंबर 2025 तक चलेगी। इच्छुक उम्मीदवार बिहार स्टाफ सेलेक्शन कमीशन की आधिकारिक वेबसाइट bssc.bihar.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं।

आयु सीमा और आवेदन शुल्क:

आवेदन के लिए न्यूनतम आयु: 21 वर्ष, अधिकतम आयु: 37 वर्ष निर्धारित किया गया हैं। आयु सीमा में छूट संबंधित नियमों के अनुसार लागू होगी।

आवेदन शुल्क की बात करें तो:

सामान्य / OBC / अन्य राज्य के लिए 540 रुपये, SC / ST / दिव्यांग / महिला उम्मीदवारों के लिए 135 रुपये निर्धारित किया गया है।

परीक्षा और चयन प्रक्रिया:

चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा, और आवश्यकतानुसार दस्तावेज़ सत्यापन शामिल होंगे। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे जल्द से जल्द आवेदन कर अपनी तैयारी शुरू कर दें।

आज 4 राशियों के सितारे चमकेंगे, जीवन में आएगा बड़ा बदलाव!

धर्म डेस्क। आज का दिन खास तौर पर उन चार राशियों के लिए भाग्यशाली साबित होगा जिनके सितारे सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर हैं। ग्रहों की चाल और ज्योतिषीय स्थिति में बदलाव से ये राशियां जीवन में महत्वपूर्ण अवसर और खुशहाली पाने वाली हैं। ज्योतिषियों के अनुसार, आज इन राशियों के लिए सफलता के नए द्वार खुलेंगे, जिससे उनके आर्थिक, व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।

1. मेष राशि

मेष राशि के जातकों के लिए आज का दिन नई योजनाओं की शुरुआत का है। आपके आत्मविश्वास और मेहनत का फल जल्द मिलेगा। व्यापारिक या नौकरी के क्षेत्र में कोई बड़ा बदलाव आपके पक्ष में रहेगा। निवेश करने के लिए यह समय अनुकूल है।

2. कर्क राशि

कर्क राशि के जातकों के लिए यह दिन प्रेम और पारिवारिक जीवन में खुशियाँ लेकर आएगा। पुरानी समस्याओं का समाधान होगा और रिश्तों में मधुरता आएगी। साथ ही आर्थिक दृष्टि से भी अच्छे लाभ के संकेत हैं।

3. तुला राशि

तुला राशि के लिए आज का दिन विशेष रूप से करियर के लिहाज से शुभ है। आपको आपके प्रयासों का मान मिलेगा और नई जिम्मेदारियां संभालने का मौका मिलेगा। आपकी काबिलियत के कारण उच्च अधिकारी आपकी तारीफ करेंगे।

4. मीन राशि

मीन राशि के जातकों के लिए आज का दिन स्वास्थ्य और मानसिक शांति लेकर आएगा। पुराने तनाव दूर होंगे और आप नए उत्साह के साथ जीवन की चुनौतियों का सामना करेंगे। साथ ही धन संबंधी लाभ के भी संकेत मिल रहे हैं।

सुबह भीगा चना और गुड़ खाएं, ये 7 बीमारियां होंगी दूर!

हेल्थ डेस्क। आज के व्यस्त और तनावपूर्ण जीवन में सेहत का ध्यान रखना बहुत जरूरी हो गया है। अच्छी सेहत के लिए सही खान-पान का चुनाव सबसे बड़ा सहारा होता है। ऐसे में सुबह का नाश्ता शरीर को ऊर्जा देने के साथ-साथ कई बीमारियों से बचाव भी करता है। एक बेहद सरल और प्रभावशाली नाश्ता है भीगा हुआ चना और गुड़।

1. पाचन संबंधी समस्याएं दूर करता है

भीगा चना फाइबर का अच्छा स्रोत है, जो पेट के लिए बहुत फायदेमंद होता है। यह कब्ज, अम्लता और गैस जैसी पाचन संबंधी परेशानियों को दूर करने में मदद करता है। गुड़ में भी पाचन तंत्र को मजबूत करने वाले तत्व होते हैं जो पाचन प्रक्रिया को सही बनाए रखते हैं।

2. हड्डियों को मजबूत बनाए

गुड़ में कैल्शियम भरपूर मात्रा में होता है जो हड्डियों को मजबूत करता है। चना में भी मिनरल्स होते हैं जो हड्डियों की मजबूती के लिए आवश्यक हैं। रोजाना सेवन से हड्डियों की कमजोरी और जोड़ों के दर्द में राहत मिलती है।

3. तनाव और थकान कम करता है

गुड़ और भीगा चना दोनों में ही ऊर्जा बढ़ाने वाले पोषक तत्व होते हैं। ये तनाव को कम कर शरीर और दिमाग को आराम देने में मदद करते हैं। सुबह के समय इसे खाने से पूरे दिन ऊर्जा बनी रहती है और थकान कम महसूस होती है।

4. रक्त संचार सुधारता है

भीगा चना और गुड़ रक्त संचार को बेहतर बनाते हैं। गुड़ में आयरन होता है जो रक्त की कमी को पूरा करता है और खून साफ करता है। इससे त्वचा में निखार आता है और थकावट भी कम होती है।

5. इम्यूनिटी बढ़ाता है

भीगा चना और गुड़ में एंटीऑक्सिडेंट्स होते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं। यह शरीर को संक्रमण और अन्य रोगों से लड़ने में सक्षम बनाता है।

6. शरीर को डिटॉक्सिफाई करता है

गुड़ शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। इससे लीवर स्वस्थ रहता है और शरीर में जमा विषैले तत्व निकल जाते हैं।

7. त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाए

गुड़ और चना के पोषक तत्व त्वचा की सुंदरता को बढ़ाते हैं। यह त्वचा को अंदर से पोषण देते हैं और उसे मुलायम और चमकदार बनाते हैं।

सीएम योगी का सख्त फरमान: यूपी के सभी जिलों में होंगे लागू!

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार देर रात एक अहम समीक्षा बैठक के जरिए प्रदेश की प्रशासनिक मशीनरी को साफ संदेश दिया की अव्यवस्था, लापरवाही और उदासीनता को अब कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित की गई, जिसमें प्रदेश के सभी मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, पुलिस कप्तान, प्रशासनिक अधिकारी और वरिष्ठ विभागीय प्रमुख शामिल हुए।

जन शिकायतों का समाधान सर्वोपरि

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से आईजीआरएस (इंटीग्रेटेड ग्रिवांस रिड्रेसल सिस्टम) और सीएम हेल्पलाइन के तहत दर्ज हो रही शिकायतों पर जोर देते हुए कहा कि प्रत्येक शिकायत का निस्तारण शिकायतकर्ता की दृष्टि से संतोषजनक और समयबद्ध होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी तंत्र की जनता के प्रति जवाबदेही सर्वोपरि है और इस जिम्मेदारी में कोई ढील नहीं दी जाएगी।

महिला सुरक्षा और ‘मिशन शक्ति’ की तैयारी

महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा को शीर्ष प्राथमिकता बताते हुए मुख्यमंत्री ने एंटी रोमियो स्क्वॉड की गतिविधियों को और अधिक सक्रिय और सघन करने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी बताया कि आगामी नवरात्रि में ‘मिशन शक्ति’ अभियान का नया चरण शुरू किया जाएगा, जिसके लिए अभी से व्यापक रणनीति बनाकर अमल शुरू कर देना चाहिए।

पीईटी परीक्षा: पारदर्शिता और सुरक्षा प्राथमिकता

छह और सात सितंबर को प्रस्तावित प्रारंभिक अर्हता परीक्षा (PET) को लेकर मुख्यमंत्री ने परीक्षा की शुचिता, पारदर्शिता और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। उन्होंने परीक्षा केंद्रों की निगरानी के लिए लाइव सीसीटीवी, सेक्टर मजिस्ट्रेट की तैनाती और यातायात प्रबंधन सहित मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए विशेष इंतजाम करने के निर्देश दिए। साथ ही यह भी चेतावनी दी कि अफवाह फैलाने या परीक्षा में गड़बड़ी की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

त्योहारों को लेकर सतर्कता और साफ-सफाई पर जोर

मुख्यमंत्री ने हालिया पर्व-त्योहारों के शांतिपूर्ण आयोजन पर संतोष व्यक्त करते हुए आगामी बरावफात, अनंत चतुर्दशी और विश्वकर्मा पूजा जैसे अवसरों को लेकर पुलिस और प्रशासन को अलर्ट मोड में रहने के निर्देश दिए। इसके साथ ही, उन्होंने सफाई व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने, जलभराव से निपटने और सार्वजनिक स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने के लिए नगर निकायों को मुस्तैदी से कार्य करने का निर्देश दिया।

स्वास्थ्य सेवाएं और नकली दवाओं पर तुरंत कार्रवाई

बरसात के मौसम में बीमारी की आशंका को देखते हुए मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य केंद्रों पर आवश्यक दवाओं की उपलब्धता, मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले के आयोजन और सर्पदंश जैसी आपात स्थितियों में त्वरित इलाज सुनिश्चित करने को कहा। साथ ही, नकली दवाओं की बिक्री पर गहरी चिंता जताते हुए स्पष्ट किया कि ऐसी गतिविधियों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संबंधित विभागों को सघन निगरानी और तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

सभी जिलों में किसानों के लिए खाद की सुचारु आपूर्ति

खरीफ सीजन को देखते हुए मुख्यमंत्री ने यह सुनिश्चित करने को कहा कि राज्य के किसी भी किसान को खाद की कमी न झेलनी पड़े। उन्होंने खाद की आपूर्ति की सघन निगरानी करने और कालाबाजारी या जमाखोरी पर कठोरतम कार्रवाई के आदेश भी जारी किए।