बता दें की इस संशोधित योजना के लिए सरकार ने ₹7,332 करोड़ का बजट आवंटित किया है। इसका उद्देश्य देशभर में रेहड़ी-पटरी और ठेला लगाने वाले छोटे व्यापारियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उन्हें औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जोड़ना है।
बिना गारंटी मिलेगा आसान लोन
प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत रेहड़ी-पटरी वालों को बिना किसी गारंटी के आसान ऋण मुहैया कराया जाएगा। इस योजना के जरिए अब तक लाखों छोटे दुकानदारों को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला है। संशोधित ढांचे में लोन की किस्तें कुछ इस प्रकार तय की गई हैं:
पहली किस्त: अब ₹5,000 की मिलेगी (पहले ₹10,000)
दूसरी किस्त: ₹25,000 की होगी (पहले ₹20,000)
तीसरी किस्त: ₹50,000 पर यथावत रखी गई है
डिजिटल लेनदेन को मिलेगा बढ़ावा
नई व्यवस्था में डिजिटल भुगतान को अपनाने वाले विक्रेताओं के लिए UPI-लिंक्ड रूपे क्रेडिट कार्ड की सुविधा जोड़ी गई है। साथ ही, डिजिटल कैशबैक इंसेंटिव की व्यवस्था भी की गई है, जिससे छोटे व्यापारियों को डिजिटल पेमेंट अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
1.15 करोड़ लाभार्थी होंगे कवर
सरकार का लक्ष्य है कि इस योजना के माध्यम से अधिक से अधिक स्ट्रीट वेंडर्स को आर्थिक रूप से मजबूत किया जाए। इसके लिए देशभर में नगर निकायों और शहरी आजीविका मिशनों के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। केंद्रीय मंत्री ने कहा, “यह योजना सिर्फ आर्थिक मदद नहीं है, बल्कि देश के सबसे निचले स्तर पर खड़े मेहनतकश नागरिकों को सम्मान और स्थायित्व देने की दिशा में एक मजबूत कदम है।”
क्या है प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना?
यह योजना जून 2020 में शुरू की गई थी, जब कोविड महामारी के कारण सबसे ज्यादा प्रभावित वर्गों में रेहड़ी-पटरी वाले शामिल थे। इसका मकसद उन्हें बिना गारंटी के कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराकर फिर से व्यापार शुरू करने में मदद करना था। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से न केवल देश की अनौपचारिक अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, बल्कि डिजिटलीकरण के लक्ष्य को भी बढ़ावा मिलेगा।

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