30 एकड़ जमीन का हो रहा अधिग्रहण
परियोजना को जमीन पर उतारने के लिए करीब 30 एकड़ भूमि की जरूरत है। इसके लिए कुल 166 रैयतों की जमीन चिन्हित की गई है। इनमें से 149 रैयतों को करीब 6 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जा चुका है, जबकि बाकी 17 रैयतों को भुगतान की प्रक्रिया चल रही है।
बाईपास बनने के बाद सोननगर-पतरातू रेललाइन की पंडित दीनदयाल उपाध्याय-गया रेलखंड से सीधी कनेक्टिविटी हो जाएगी। इसका सबसे बड़ा फायदा उन मालगाड़ियों को होगा जो झारखंड के खनिज और कोयला क्षेत्रों से सोननगर के रास्ते आगे जाती हैं।
इंजन बदलने और समय की होगी बचत
अभी कई मालगाड़ियों को सोननगर जंक्शन से होकर गुजरना पड़ता है। दिशा बदलने की वजह से कई मामलों में इंजन बदलने की जरूरत पड़ती है, जिससे परिचालन में अतिरिक्त समय लगता है। नई बाईपास लाइन तैयार होने के बाद मालगाड़ियां सोननगर जंक्शन में प्रवेश किए बिना सीधे आगे निकल सकेंगी। इससे इंजन बदलने और अनावश्यक ठहराव की जरूरत कम होगी। वहीं, गया और धनबाद की तरफ से डालटनगंज, गढ़वा और पतरातू जाने वाली मालगाड़ियों को भी सीधा मार्ग मिल सकेगा।
कई इलाकों को मिलेगा फायदा
इस परियोजना का लाभ झारखंड के डालटनगंज, गढ़वा और पतरातू जैसे क्षेत्रों से जुड़ी माल ढुलाई को मिलेगा। इसके अलावा धनबाद से उत्तर प्रदेश के रेणुकूट की ओर जाने वाली मालगाड़ियों के लिए भी यह बाईपास उपयोगी साबित हो सकता है। रेलवे के मुताबिक, नई लाइन से मालगाड़ियों की आवाजाही तेज होगी, समय की बचत होगी और सोननगर जंक्शन पर परिचालन का दबाव घटेगा।
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