खेतों में भी हो सकेगी मखाना की खेती
मखाना उत्पादन को बढ़ाने के लिए अब इसे केवल तालाब या बड़े पोखरों तक सीमित नहीं रखा गया है। किसान सामान्य खेतों में पानी रोककर भी इसकी खेती कर सकते हैं। खेत पद्धति से खेती को बढ़ावा मिलने से ऐसे किसानों के लिए भी मखाना उत्पादन का रास्ता खुला है, जिनके पास बड़े तालाब या पोखर उपलब्ध नहीं हैं।
इन जिलों के किसानों को मिलेगा लाभ
योजना के दायरे में दरभंगा, मधुबनी, पूर्णिया, कटिहार, सहरसा, सुपौल, किशनगंज, अररिया, मधेपुरा, सीतामढ़ी, खगड़िया, समस्तीपुर, भागलपुर, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण और मुजफ्फरपुर समेत कुल 21 जिले शामिल किए गए हैं। इससे राज्य के अलग-अलग हिस्सों में मखाना उत्पादन को विस्तार मिलने की उम्मीद है।
बीज और मशीनों पर भी सहायता
सरकार खेती के साथ मखाना उत्पादन की पूरी प्रक्रिया को आसान बनाने पर भी जोर दे रही है। किसानों को स्वर्ण वैदेही और सबौर मखाना-1 जैसी उन्नत किस्मों के बीज उपलब्ध कराने के साथ प्रसंस्करण से जुड़े उपकरण और किट पर भी सहायता दी जा रही है। इससे उत्पादन के बाद मखाना की प्रोसेसिंग में लगने वाली मेहनत और लागत कम करने में मदद मिल सकती है।
ऑनलाइन कर सकते हैं आवेदन
योजना का लाभ लेने के इच्छुक किसान संबंधित विभाग के पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। उद्यान निदेशालय से जुड़ी योजनाओं के जरिए भी पात्र किसान उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी लेकर आवेदन कर सकते हैं। किसानों को आवेदन से पहले पात्रता, जरूरी दस्तावेज और अनुदान की शर्तों की जानकारी जरूर जांच लेनी चाहिए।
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