1. न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की मांग
पेंशनर संगठनों की प्रमुख मांग न्यूनतम पेंशन में बड़ी बढ़ोतरी की है। कुछ संगठनों ने मौजूदा न्यूनतम बेसिक पेंशन को बढ़ाकर 45 हजार रुपये करने का प्रस्ताव रखा है। अगर सरकार इस तरह की मांग स्वीकार करती है तो कम पेंशन पाने वाले रिटायर्ड कर्मचारियों को बड़ा फायदा हो सकता है।
2. आखिरी वेतन के आधार पर पेंशन में बदलाव
पेंशन की गणना के नियमों में बदलाव की भी मांग की जा रही है। कर्मचारी संगठनों की ओर से फुल पेंशन को आखिरी बेसिक वेतन के 67 फीसदी तक करने का प्रस्ताव सामने आया है। हालांकि यह फिलहाल मांग है और इस पर अंतिम फैसला सरकार व आयोग की सिफारिशों के बाद ही होगा।
3. लीव एनकैशमेंट की सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव
रिटायरमेंट के समय बचे हुए अर्जित अवकाश के बदले मिलने वाली रकम को लेकर भी राहत की मांग है। कर्मचारी संगठनों ने मौजूदा 300 दिनों की सीमा को बढ़ाने का सुझाव दिया है। अगर प्रस्ताव स्वीकार होता है तो रिटायरमेंट के समय मिलने वाली एकमुश्त राशि बढ़ सकती है।
4. पेंशन कम्यूटेशन पर राहत
पेंशन कम्यूट करने वाले कर्मचारियों को पूरी पेंशन बहाल होने में फिलहाल लंबा इंतजार करना पड़ता है। पेंशनर संगठनों ने इस अवधि को घटाने की मांग की है। प्रस्ताव के मुताबिक इसे करीब 11 से 12 साल तक किए जाने की बात कही गई है। इससे संबंधित पेंशनर्स को पहले पूरी पेंशन मिलने का रास्ता खुल सकता है।
5. मेडिकल सुविधाओं में सुधार की मांग
गैर-CGHS क्षेत्रों में रहने वाले पेंशनर्स के लिए फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस बढ़ाने की मांग भी उठी है। संगठनों ने मौजूदा राशि में पर्याप्त बढ़ोतरी के साथ दूरदराज के इलाकों में बेहतर और कैशलेस इलाज की सुविधा देने का सुझाव दिया है।
अभी फैसले का इंतजार
इन पांचों बिंदुओं को फिलहाल प्रस्ताव और मांग के तौर पर देखना चाहिए। 8वें वेतन आयोग की अंतिम सिफारिशें और सरकार का निर्णय आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि पेंशनर्स को वास्तव में कितना लाभ मिलेगा। इसलिए अभी किसी निश्चित पेंशन बढ़ोतरी या रकम को सरकारी फैसला मानना सही नहीं होगा।

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