कार्यकाल खत्म होने से पहले चुनाव की मांग
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में दलील दी गई कि मौजूदा पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने से पहले नए चुनाव की प्रक्रिया शुरू होनी चाहिए। याचिका में संविधान और पंचायती राज से जुड़े प्रावधानों का हवाला देते हुए चुनाव में देरी नहीं करने की मांग की गई है।
परिसीमन की वजह से बढ़ी चुनौती
बिहार में पंचायत चुनाव से पहले परिसीमन की प्रक्रिया भी चल रही है। 2011 की जनगणना के आधार पर ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद क्षेत्रों की नई सीमाएं तय की जा रही हैं। परिसीमन पूरा होने के बाद ही सीटों की आरक्षण व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके बाद नई मतदाता सूची तैयार करने और मतदान केंद्र तय करने की प्रक्रिया होगी। यही वजह है कि चुनाव समय पर कराने को लेकर अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
2021 में हुए थे पिछले पंचायत चुनाव
बिहार में पिछला पंचायत चुनाव 2021 में हुआ था। चुनाव कई चरणों में सितंबर से दिसंबर के बीच कराए गए थे। मौजूदा पंचायत प्रतिनिधियों का पांच साल का कार्यकाल 2026 के अंत में पूरा होने वाला है। अब हाईकोर्ट में सरकार और निर्वाचन आयोग के जवाब के बाद चुनाव की तैयारियों को लेकर तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है।

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