BRICS या G7, कौन है ज्यादा ताकतवर? GDP के आंकड़ों में सामने आई बड़ी तस्वीर

नई दिल्ली। दुनिया की आर्थिक ताकत का संतुलन तेजी से बदल रहा है। एक तरफ अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, इटली, कनाडा और जापान वाला G7 है, तो दूसरी ओर भारत, चीन, रूस, ब्राजील समेत तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं का BRICS समूह लगातार अपना दायरा बढ़ा रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर आर्थिक ताकत के मामले में BRICS आगे है या G7?

PPP के हिसाब से BRICS का पलड़ा भारी

हालिया आंकड़ों और बयानों में BRICS की आर्थिक हिस्सेदारी करीब 40 फीसदी बताई जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी BRICS देशों को दुनिया की करीब 40% GDP और 25% से अधिक वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधि बताया है। IMF के PPP आंकड़ों में भी BRICS की बड़ी हिस्सेदारी दिखाई देती है।

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने नई दिल्ली में BRICS बिजनेस फोरम के दौरान दावा किया कि पिछले पांच वर्षों में BRICS देशों ने दुनिया की GDP में 40% से अधिक योगदान दिया, जबकि G7 की हिस्सेदारी 29% रही। उन्होंने इसी आधार पर G7 की आर्थिक स्थिति पर सवाल उठाया।

लेकिन एक जरूरी बात समझना जरूरी है

GDP की तुलना इस बात पर निर्भर करती है कि गणना PPP (Purchasing Power Parity) से की जा रही है या Nominal GDP से। PPP में देशों की घरेलू कीमतों और खरीदने की क्षमता को ध्यान में रखा जाता है। इस पैमाने पर BRICS का आकार G7 से बड़ा है।

वहीं Nominal GDP में अमेरिकी डॉलर की मौजूदा विनिमय दर के आधार पर अर्थव्यवस्था का मूल्यांकन होता है। इस पैमाने पर G7 की आर्थिक ताकत अब भी काफी बड़ी है। इसलिए केवल एक आंकड़े के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि BRICS ने हर मामले में G7 को पीछे छोड़ दिया है।

BRICS की सबसे बड़ी ताकत क्या है?

BRICS की ताकत सिर्फ GDP तक सीमित नहीं है। इसके सदस्य देश दुनिया की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं और ऊर्जा, कच्चे माल, विनिर्माण, कृषि तथा बड़े उपभोक्ता बाजारों में इनकी भूमिका महत्वपूर्ण है। 2026 में समूह के विस्तार के साथ इसका वैश्विक प्रभाव और बढ़ा है। भारत और चीन जैसे बड़े बाजार, रूस की ऊर्जा क्षमता और ब्राजील जैसे संसाधन संपन्न देश BRICS को अलग-अलग क्षेत्रों में मजबूत बनाते हैं।

G7 अभी भी दुनिया में क्यों महत्वपूर्ण है?

दूसरी ओर G7 के पास विकसित अर्थव्यवस्थाओं की मजबूत वित्तीय व्यवस्था, बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियां, तकनीकी क्षमता और वैश्विक वित्तीय संस्थानों में प्रभाव है। व्यापार और निवेश के क्षेत्र में भी G7 की पकड़ मजबूत बनी हुई है। इसलिए BRICS की बढ़ती GDP हिस्सेदारी का मतलब यह नहीं है कि G7 की वैश्विक ताकत खत्म हो गई है।

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