वित्त वर्ष 2024-25 में भारत-रूस व्यापार करीब 68.7 अरब डॉलर रहा। इसमें भारत का रूस को निर्यात लगभग 4.9 अरब डॉलर, जबकि आयात 63.8 अरब डॉलर रहा। ऐसे में नए व्यापार लक्ष्य के साथ भारत की कोशिश अपने निर्यात को तेजी से बढ़ाने की है।
इन 7 सेक्टर्स पर रहेगा फोकस
1. फार्मा: रूस में भारतीय दवाओं की पहुंच बढ़ाने से फार्मा कंपनियों के लिए नए बाजार खुल सकते हैं।
2. ऑटो और ऑटो पार्ट्स: ट्रैक्टर, वाहन कलपुर्जे और ऑटो कंपोनेंट्स के निर्यात की संभावनाएं बढ़ रही हैं।
3. इंजीनियरिंग और केमिकल: मशीनरी, औद्योगिक सामान और केमिकल उत्पाद रूस के बाजार में भारतीय निर्यात को गति दे सकते हैं।
4. टेक्सटाइल: कपड़ा और संबंधित उत्पादों के लिए रूसी बाजार में विस्तार की संभावना तलाशी जा रही है।
5. कृषि और फूड: चाय, कॉफी, मसाले, समुद्री उत्पाद, मांस और अन्य खाद्य वस्तुओं के निर्यात को बढ़ावा मिल सकता है।
6. ऊर्जा और न्यूक्लियर: तेल-गैस के साथ परमाणु ऊर्जा, माइनिंग और अन्य ऊर्जा परियोजनाओं में सहयोग बढ़ाने पर जोर है।
7. टेक्नोलॉजी और क्रिटिकल मिनरल्स: डिजिटल तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक्स, AI, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और महत्वपूर्ण खनिजों में सहयोग भविष्य के कारोबार का नया आधार बन सकता है।
व्यापार घाटा कम करना बड़ी चुनौती
भारत के लिए 100 अरब डॉलर का लक्ष्य केवल रूस से ज्यादा सामान खरीदने से पूरा नहीं होगा। मौजूदा व्यापार असंतुलन को देखते हुए फार्मा, ऑटो पार्ट्स, इंजीनियरिंग, कृषि और दूसरे उत्पादों का निर्यात बढ़ाना जरूरी होगा।
दोनों देशों की योजना 2030 तक 100 अरब डॉलर के व्यापार के साथ 50 अरब डॉलर के द्विपक्षीय निवेश को भी बढ़ावा देने की है। इससे भारत की कंपनियों के लिए रूसी बाजार में नए अवसर बन सकते हैं और व्यापार को ज्यादा संतुलित करने में मदद मिल सकती है।

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