बालवाटिका में पढ़ाई का तरीका बच्चों की उम्र और रुचि के अनुसार रखा जाएगा। खेल, कहानी, गतिविधियों और रचनात्मक कार्यों के जरिए भाषा, शुरुआती साक्षरता और संख्याज्ञान के साथ बच्चों के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास पर काम होगा।
बच्चों के लिए होंगी ये 10 व्यवस्थाएं
सरकार के निर्देशों के अनुसार विद्यालय परिसर में मौजूद आंगनबाड़ी केंद्रों को बालवाटिका के तौर पर विकसित किया जाएगा। यहां बच्चों के लिए सुरक्षित कक्षा या उपयुक्त स्थान उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अलावा गतिविधि आधारित कार्यक्रम, दक्षता कैलेंडर और बच्चों की प्रगति की नियमित जानकारी की व्यवस्था होगी।
बालवाटिका में पुस्तक, ब्लॉक, कला-क्राफ्ट और नाटक/प्रदर्शन कॉर्नर बनाए जाएंगे। बच्चों के लिए उम्र के अनुरूप अभ्यास पुस्तिकाएं, कार्यपत्रक और एससीईआरटी की शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। बालमैत्री फर्नीचर, खेल सामग्री, टीएलएम और प्रिंट रिच वातावरण भी तैयार किया जाएगा। जहां पर्याप्त जगह होगी, वहां खेल क्षेत्र, आउटडोर प्ले सामग्री, बच्चों के अनुकूल हैंडवॉश यूनिट और शौचालय की सुविधा भी सुनिश्चित की जाएगी।
अभिभावकों को बच्चे की प्रगति की जानकारी
बालवाटिका में बच्चों का समग्र प्रगति पत्र तैयार किया जाएगा। साल में कम से कम दो बार अभिभावकों को बच्चे की सीखने और विकास से जुड़ी प्रगति बताई जाएगी। इससे माता-पिता भी बच्चे की जरूरत और सुधार के क्षेत्रों को बेहतर तरीके से समझ सकेंगे।
नामांकन और उपस्थिति पर भी रहेगी नजर
सरकार का लक्ष्य संबंधित आंगनबाड़ी केंद्रों के क्षेत्र में आने वाले 3 से 6 वर्ष के बच्चों का शत-प्रतिशत नामांकन और कम से कम 70 प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करना है। इसके लिए स्कूल, आंगनबाड़ी, आशा कार्यकर्ता और शिक्षा विभाग के अधिकारियों के बीच समन्वय बढ़ाया जाएगा।
जिला स्तर पर ईसीसीई कोर ग्रुप बनाकर बालवाटिकाओं के संसाधन, प्रशिक्षण और निगरानी की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही, स्कूलों के आसपास गैर-विभागीय भवनों में चल रहे आंगनबाड़ी केंद्रों को विद्यालय परिसर में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया पर भी नजर रखी जाएगी।

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